मैं भोला पर्वत का
(भक्ति गीत)
मैं भोला पर्वत का, मेरी गुफा अँधियारी है,
त्रिशूल उठाके चलता हूँ, जटाओं में गंगाजी प्यारी है।
भस्म रमाई देह पे मोरी, डमरू की आवाज़ निराली है,
साँपों का हार गले में डाले, औघड़ मेरी चाल निराली है।
जय शिव शंकर, जय त्रिपुरारी
कैलाशपति, तू भोले भंडारी।
तू नाथ है सब साधु-संतन का,
तेरे बिना न कोई सहारा।
जटा में बहे गंगा की धारा,
तेरा ध्यान करे ये सारा।
भोले बाबा पर्वत वासी,
तेरी महिमा सबसे न्यारी।
कभी न छोड़े तू अपना भक्त,
तू है दीनों का रखवाली।