भांग पी ली गोरा नै,
भोले नै देख कै हांसी आगी।
बोली – “आज मैं भी तेरे जैसी,
मस्त मलंग बनी जाऊंगी!”
झूमे झूमे गौरा रानी,
बोलण लागी बण के दीवानी।
“हर हर बम बम” करती फिरे,
नंदी बोले – “अब तो गजब करी रानी!”
भोले बोले – “अब तू समझे सै,
भांग का रस के जादू सै।
जग के झमेले भूल जा सारे,
बस भक्ति में तू झूमे सै।”
गौरा बोली – “तेरी दुनिया न्यारी,
भस्म, डमरू, और गंगा प्यारी।
अब से रोज तेरे संग बैठूंगी,
एक घूँट भांग मैं भी ले लूंगी।”
भांग पी ली गोरा नै,
शिव जी की लीला में रंग आगी।
प्रेम और भक्ति का ये संगम,
दुनिया को शिव–शक्ति सिखा गई।