एक तो डम डमर दे
गोरा डमना की
दूजा बम बम बोले
भोला भंडारी की
तीजा गंगा मैया
भोले के सिर चढ़ी
भोले के भक्तों ने
सच्ची लगन जड़ी।
हर-हर बम बम,
जय शिव शंकर बम बम
कांवड़ उठा के चले
जयकारा बम बम।
भोले का रूप निराला
त्रिशूल और डमरू वाला
साँप गले का हार है
भूत-भावन का सार है।
कैलाश पर्वत वाले
गौरा के भोले नाथ
जटाओं में बहती गंगा
सब पर करते हैं साक्षात।
भोले बाबा की महिमा
सबको कर दे निरोग
सावन में जो नाम ले
वो पाता है संयोग।
डमरू की वो धुन बजी
नंदी ने सवारी सजाई
जयकारों से गूंज उठा
शिवभक्तों की टोली आई।