किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥ जब गिरते हुए मैंने तेरे नाम लिया है। तो गिरने ना दिया तूने, मुझे थाम लिया है॥ तुम अपने भक्तो पे कृपा करती हो, श्री राधे। उनको अपने चरणों में जगह देती हो श्री राधे। तुम्हारे चरणों में मेरा मुकाम हो जाए॥ मांगने वाले खाली ना लौटे, कितनी मिली खैरात ना पूछो। उनकी कृपा तो उनकी कृपा है, उनकी कृपा की बात ना पूछो॥ ब्रज की रज में लोट कर, यमुना जल कर पान। श्री राधा राधा रटते, या तन सों निकले प्राण॥ गर तुम ना करोगी तो कृपा कौन करेगा। गर तुम ना सुनोगी तो मेरी कौन सुनेगा॥