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      जय अम्बे गौरी आरती 
      जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
      तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

      जय अम्बे गौरी...

      चन्द्रमुखी माखनचोरी, मनमोहन चितचोरी।
      कबि सुर मुनिजन गावत, जय जय जय जगदम्बे॥

      भुजा चार अति शोभा, वरमुद्रा धरि सोभा।
      कनक सिंगासन राजत, कोटि रतन ज्योतिषा॥

      माल्य पुष्प गंध लावत, मन भावे मोती चढ़ावत।
      शंकर शिव के संग नाचत, ब्रह्मा विष्णु पूजत॥

      धूप दीप मेवा मिश्री, पूजन करै मुनि ईश्वरी।
      सिन्दूर लपटत तन शोभित, सिंह सवारी शोभा॥

      जो कोई तुमको ध्यावत, संकट से मुक्ति पावत।
      कहत अंबे यह आरती, सुख संपत्ति पावत॥

      समापन:
      जय जय माँ, जय माँ अम्बे
      करुणा करो माँ, संकट हरो माँ
      भक्तों की रक्षा करो माँ
      जय जय माँ, जय अम्बे माँ