आज मोरे शिव घर आवेंगे,
भक्ति की ज्योत जलावेंगे।
कांधे पर त्रिशूल लिए,
डमरू स्वर में गूंज उठेंगे।
बिल्वपत्र, भस्म और गंगाजल,
सब कुछ अर्पण कर दूंगी मैं।
आज तो मेरे भोले बाबा,
खुद ही दर्शन देंगे मुझे॥
नंदी के स्वर गूंज रहे,
कैलाश से मेघ बरस रहे।
शिव शंकर मेरे अंगना आए,
सारे दुःख अब दूर हो जाएं।
भोले की छाया में बैर नहीं,
हर चेहरे पर मुस्कान है।
जो नाम जपे शंकर का,
उसका जीवन आसान है॥
आज मोरे शिव घर आवेंगे,
मन मंदिर में वास करेंगे।
हर-हर महादेव की गूंज से,
सारा जीवन प्रकाश करेंगे।