भोले गिरजा पति, हूँ तुम्हारी शरण
कर दो मेरी नैया पार
डूब रहा जीवन अज्ञान में
अब तो लगाओ पार…
जटा में गंगा, गले में सर्पों की माला
भस्म लिपटे हैं तन पर, सजी है दिव्य जटाओं वाला
कंठ में विषधर है वास, फिर भी कहे सबको प्यार
कर दो मेरी नैया पार…
नंदी तुम्हारा वाहन है, डमरू की ध्वनि प्यारी
भूतों के संग रहते हो, फिर भी हो सबके उधारी
शिव नाम जपे जो प्राणी, मिटे उसका हर विकार
कर दो मेरी नैया पार…
कैलाशपति हे शंकर, त्रिपुरारी महाकाल
संसार के दुख हरते, तुम ही रखो अब ख्याल
भवसागर से बचा लो, काटो जन्मों का जंजाल
कर दो मेरी नैया पार…
भोले गिरजा पति, हूँ तुम्हारी शरण
अब तो लगाओ पार…