हर हर महादेव, गूंजे ये नाम,
शिव के चरणों में मिले विश्राम।
कालों का काल है त्रिनेत्रधारी,
संसार का एकमात्र सहारी।
डमरू की धुन से कांपे काया,
नंदी पर सवार हो कर आए माया।
गंगा जटाओं में लहराए,
भस्म रमाये, योग रचाए।
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हर हर महादेव, शंभू शंकर,
जपे जो नाम, मिटे संकट हर।
भोले का दर है सबसे न्यारा,
देता है सबको वो प्यार दुबारा।
जटा में गंगा, कंठ में विष,
करुणा में बसता उसका हर दृष्टि।
वैरागी योगी, भक्तों के प्यारे,
शिव नाम के बिना सब सूने सहारे।
हर हर महादेव, बोलो जयकारा,
शिव के दर पर मिले उजियारा।
भक्तों की सुनते हैं भोलेनाथ,
करते हैं पूरी हर एक बात।