शरण में लिया है नाम भोले के वरण में।
त्रिपुंड लगाए, जटा में गंगा विराजे,
डमरू बजाए, कैलाश में वो विराजे॥ 1 ॥
भोले नाथ की महिमा न्यारी,
दया के सागर, सदा सहकारी।
हर हर महादेव का हम जाप करें,
मन मंदिर में शिव को हम स्थापित करें॥ 2 ॥
शिव शंकर करुणा के धारे,
बन जाए हर दुख हमारे सहारे।
कृपा दृष्टि जब उन पर पड़ती,
नदियाँ भी उल्टी दिशा में बहती॥ 3 ॥
हे नीलकंठ! कर दो अब उद्धार,
नाम तुम्हारा ही एक आधार।
संसार सागर पार लगाओ,
भक्तों को अपना चरण दिखाओ॥ 4 ॥