हारा हु मै जग से राह दिखाओ भोलेनाथ कभी नंदी पर सवार होके आओ भोलेनाथ टूट ना जाऊ आकर गले लगाओ भोलेनाथ कभी नंदी पर सवार होके आओ भोलेनाथ पहला अंतरा मैंने सुना है भक्तो पर प्रभु छन मे आप लुभाते हो सबकी नइया भावसागर से पल मे पार लगाते हो गीर ही गई हु अब तो मुझे उठाओ भोलेनाथ कभी नंदी पर सवार होके आओ भोलेनाथ दूसरा अंतरा अंधीयारों से मुक्ति भगवन एक आप दिलाते हो जग मग तुम ज्योति जीवन मे सबकी जलाते हो
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