मेरी गौरा रानी, मुझे ना तुम बदनाम करो,
भोले के दरबार में, अपनी बातें ना आम करो।
मैं तो भक्त तुम्हारा, हर दम जपता नाम,
तुम ही तो हो मेरी शरण, मेरा कुल इमान।
तुमसे आस लगाई है, जीवन की ये डोर,
फिर क्यों मेरे भोलेनाथ, बन बैठे हो कठोर?
मेरी गौरा रानी, मुझे ना तुम बदनाम करो,
भोले के दरबार में, अपनी बातें ना आम करो।
सावन में काँवड़ लाया, जल अर्पण किया,
मन से पुकारा तुमको, हर व्रत नियम निभाया।
तुम ही साक्षी बनो आज, मेरी भक्ति की लाज,
तुम तो दयालु हो माता, फिर क्यों कर रही साज?
गौरा बोली मुस्काके, "भक्त तू प्यारा है,
पर परीक्षा भी ज़रूरी है, यही हमारा न्यारा है।
जो सच्चा निकलेगा, वही परमधाम पावेगा,
तू डगमग न होना, तेरा भी दिन आएगा।"
मेरी गौरा रानी, अब मुझ पर भी करुणा करो,
भोले के चरणों में, जीवन मेरा सफल करो।
मेरी गौरा रानी, मुझे ना तुम बदनाम करो,
भोले के दरबार में, अपनी बातें ना आम करो।