मुझे बांसुरी के कान्हा, सातों ही सुर तू दे दे,
तेरी महिमा दिल से गाऊँ,
मुझे ऐसा वर तू दे दे,
जी चाहे मैं भी तुझसे, गीता का सार जानूँ,
तेरी करुणा मुझ पर बरसे, तेरा ही नाम जापूँ।
जहाँ हो तेरा बसेरा, मुझे ऐसा घर तू दे दे,
मुझे बांसुरी के कान्हा, सातों ही सुर तू दे दे…
मेरे मुख से हर समय ही, बस हरि नाम निकले,
तेरे सुर से सुर मिलाऊँ, तेरा ही नाम निकले।
आ जाए तू भी सुनकर, ऐसा असर तू दे दे,
मुझे बांसुरी के कान्हा, सातों ही सुर तू दे दे…
नाही सूर, नाही मीरा, रसखान भी नहीं मैं,
भक्ति के धन से इतना धनवान भी नहीं मैं।
पहचान लूँ तुझे मैं, ऐसी नज़र तू दे दे
मुझे बांसुरी के कान्हा, सातों ही सुर तू दे दे…
ओ भगवन, तुम्हें कैसे पुकारें,
जो तुम आओ निकट हमारे
अश्रु बहे हैं भक्ति भाव के,
जब जब जपे नाम तिहारे।
मेरे हृदय में शमन करो तुम,
अपने पास बुला लो कान्हा,
झूठे जग से ना मिला मुझे कुछ,
अब बस चाहूँ प्रेम तुम्हारा।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे
मुझे बांसुरी के कान्हा, सातों ही सुर तू दे दे,
तेरी महिमा दिल से गाऊँ,
मुझे ऐसा वर तू दे दे,
जी चाहे मैं भी तुझसे, गीता का सार जानूँ,
तेरी करुणा मुझ पर बरसे, तेरा ही नाम जापूँ।
जहाँ हो तेरा बसेरा, मुझे ऐसा घर तू दे दे,
मुझे बांसुरी के कान्हा, सातों ही सुर तू दे दे…
मेरे मुख से हर समय ही, बस हरि नाम निकले,
तेरे सुर से सुर मिलाऊँ, तेरा ही नाम निकले।
आ जाए तू भी सुनकर, ऐसा असर तू दे दे,
मुझे बांसुरी के कान्हा, सातों ही सुर तू दे दे…
नाही सूर, नाही मीरा, रसखान भी नहीं मैं,
भक्ति के धन से इतना धनवान भी नहीं मैं।
पहचान लूँ तुझे मैं, ऐसी नज़र तू दे दे
मुझे बांसुरी के कान्हा, सातों ही सुर तू दे दे…
ओ भगवन, तुम्हें कैसे पुकारें,
जो तुम आओ निकट हमारे
अश्रु बहे हैं भक्ति भाव के,
जब जब जपे नाम तिहारे।
मेरे हृदय में शमन करो तुम,
अपने पास बुला लो कान्हा,
झूठे जग से ना मिला मुझे कुछ,
अब बस चाहूँ प्रेम तुम्हारा।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे
राम हरे राम, राम राम हरे हरे