सावन महीना आएगा तो पीहर जाऊंगी,
भोलेनाथ से कह के बिदा हो जाऊंगी।
ससुराल में तो रह ली बहुत दिन,
अब गौरी को माँ-बाबुल से मिलना है किन।
नैहर बुला लो बाबा जी अबकी,
सावन की झूला झूलूंगी छब्बी।
भोले शंकर कहे, "मत जाओ गौरी,
मेरे बिना कैसे रहोगी तू छोरी?"
गौरा हँस के बोले भोले से प्यारे,
"एक महीना तो दे दो नैहर हमारे।"
सावन महीना आएगा तो पीहर जाऊंगी,
भोलेनाथ से कह के बिदा हो जाऊंगी।
पीहर में झूले पड़ेंगे बगिया में,
सखियों संग नाचूंगी गइया में।
मां के हाथों खाना पाऊंगी,
पिता की गोदी में मुस्काऊंगी।
भोलेनाथ ने आखिरकार हां भर दी,
गौरा नैहर चलीं, डोली सज गई।
गाँव में बजने लगे ढोल-नगाड़े,
सावन में गौरा के दर्शन को लोग सारे।
सावन महीना आएगा तो पीहर जाऊंगी,
भोलेनाथ से कह के बिदा हो जाऊंगी।