(अंतरा 1)
सर पर मुकुट, हाथ में तलवार,
नारी भी रणभूमि की पहचान।
धूप में भी छांव बनी,
रानी थी वो, आग बनी।
(कोरस)
जय जय रानी, राजघराने की रानी,
शेरों सी चाल, वीरों की कहानी।
झुकी नहीं थी, कभी तू ज़माने से,
तेरा नाम अमर है हर फसाने में।
(अंतरा 2)
चूड़ियाँ नहीं बस श्रृंगार की,
थी गूंज तलवार की झंकार की।
सीखा जिसने न्याय का पाठ,
बचा ली प्रजा, मिटा दिए घात।
(कोरस)
जय जय रानी, राजघराने की रानी,
सिंहासन भी तुझसे शरमाए, महारानी।
तू माँ भी थी, तू योद्धा भी,
धड़कन-सी बसी हर जन-मन में अभी।
(अंतरा 3)
कभी झांसी, कभी चित्तौड़ की माटी,
हर कण-कण में तेरी गाथा बांटी।
गूँजे तेरा नाम सदियों तक,
तू अमर है, समय के हर पन्ने पर।
(अंतिम कोरस)
जय जय रानी, तू भारत की शान,
तेरे जैसी नारी हो हर जान।
रानी थी तू, रानी रहेगी,
हर युग में, हर दिल में बसेगी।