श्याम चूड़ी बेचने आया,
गोरी तेरा मन ललचाया।
नीली, पीली, हरी गुलाबी,
चूड़ी में मोहन मुस्काया।
झूले में बैठी राधा रानी,
काजल लगाके शर्माई।
कन्हैया बोला – चूड़ी पहन लो,
इसी बहाने पास तो आई।
श्याम चूड़ी बेचने आया,
प्रेम रंग उसमें समाया।
ब्रज की गली-गली गूंजे,
मुरली की मीठी तान।
मोहन चूड़ी दे के बोले,
राधा सुन ले मेरी जान।
काँच नहीं ये प्रेम की चूड़ी,
तोड़ न पाना कोई माया।
श्याम चूड़ी बेचने आया,
राधा का मन मोह ले जाया।
बंसीधर की लीला न्यारी,
हर दिल को भाए प्यारी।
आज भी जब झूमे राधा,
वो चूड़ी खनकाए सारी।
बोलो राधे राधे प्यारे,
श्याम नाम मन को भाया।
श्याम चूड़ी बेचने आया,
भक्ति का बाजार सजाया।