
स्थानीय मान्यता के अनुसार:
कानपुर शहर में स्थित पनकी हनुमान मंदिर (श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर) देश के सबसे प्रसिद्ध और चमत्कारी मंदिरों में से एक है। यह धाम न केवल अपनी पौराणिक कथाओं बल्कि अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है।
मंदिर की स्थापना को लेकर दो बेहद लोकप्रिय कथाएं प्रचलित हैं:
1. महंत पुरुषोत्तम दास जी की कथा कहा जाता है कि करीब 400 साल पहले महंत पुरुषोत्तम दास जी चित्रकूट धाम की यात्रा से लौट रहे थे। जब वह वर्तमान पनकी क्षेत्र के जंगलों से गुजर रहे थे, तब उन्हें एक विशाल अद्भुत चट्टान दिखाई दी। ध्यान से देखने पर उस चट्टान पर बजरंगबली का दिव्य स्वरूप (छवि) उभरा हुआ दिखाई दिया। इसे भगवान का आदेश मानकर महंत जी ने उसी पवित्र स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया, जिसे आज पनकी मंदिर कहा जाता है।
2. रामायण काल से जुड़ाव (कछुआ तालाब की कथा) एक अन्य लोक मान्यता के अनुसार, रामायण काल में जब लक्ष्मण जी माता सीता को वन छोड़ने जा रहे थे, तब हनुमान जी इसी स्थान पर अदृश्य रूप में माता की रक्षा के लिए मौजूद थे। मंदिर परिसर में स्थित कछुआ तालाब को बेहद पवित्र माना जाता है और भक्त इसे उसी काल से जोड़कर देखते हैं।
मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य: दिन में 3 बार बदलता है मुखमंडल
पनकी मंदिर की सबसे चमत्कारी और अनोखी विशेषता यह है कि यहाँ स्थापित पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा के चेहरे का भाव दिन में तीन बार बदलता है:
सुबह (बाल रूप):- सूर्योदय के समय भगवान का मुखमंडल एक छोटे बच्चे (बाल हनुमान) की तरह कोमल और मासूम दिखाई देता है।
दोपहर (ब्रह्मचारी रूप):- दोपहर होते-होते भगवान के चेहरे के भाव एक ओजस्वी और ऊर्जावान युवा (ब्रह्मचारी) जैसे हो जाते हैं।
शाम (महापुरुष रूप):- संध्या आरती के समय प्रभु का मुख एक प्रौढ़, तेजस्वी और गंभीर महापुरुष की तरह दिखाई देता है।
उपलब्ध स्रोतों/मंदिर की जानकारी के अनुसार:
कानपुर से भी पुराना इतिहास: माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना कानपुर शहर के बसने से भी पहले हुई थी।
400 वर्ष प्राचीन: स्थानीय और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है। [1, 2]
मंदिर की स्थापना श्री 1008 महंत पुरुषोत्तम दास जी महाराज ने की थी।
वर्ष 1961: नीम करोली बाबा ने पनकी में एक नए हनुमान मंदिर के निर्माण की जिम्मेदारी देवकामता दीक्षित जी को सौंपी।
21 जनवरी 1964: इस दिन नीम करोली बाबा की देखरेख में मंदिर परिसर में नए विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा की गई और भव्य भंडारा आयोजित हुआ।
संक्षेप में कहें तो मूल स्वयंभू मंदिर का इतिहास लगभग 1600-1650 ईस्वी (400 साल पुराना) है, जबकि इसके आधुनिक भव्य स्वरूप और आश्रम का विस्तार वर्ष 1964 में पूरा हुआ था।
Panki Rd Panki Mandir Shatabdi Rd 27، 208020 Kanpur، India
Monday
5:00 am - 12:00 pm2:00 pm - 10:00 pm
Tuesday
4:00 am - 12:00 am
Wednesday
5:00 am - 12:00 pm2:00 pm - 10:00 pm
Thursday
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Friday
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Saturday
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Sunday
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September 28, 2026 4:45 am local time
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दिन में तीन बार बदलता है प्रभु का रूप:- पनकी के हनुमान जी की सबसे चमत्कारी और रहस्यमयी विशेषता यह है कि उनके मुख का भाव दिन में तीन बार बदलता है। सुबह के समय विग्रह का मुखबाल हनुमान (एक मासूम बच्चे) जैसा दिखता है, दोपहर में यह एकतेजस्वी युवाकी भांति प्रतीत होता है, और संध्या आरती के समय प्रभु का मुख एकवृद्ध महापुरुष या ब्रह्मचारीजैसा गंभीर दिखाई देता है।
क्या आप जानते हैं? अलौकिक पंचमुखी विग्रह:इस मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति के पांच मुख हैं। एक मुख केंद्र में, एक-एक मुख दाएं-बाएं, एक मुख पीछे की ओर और एक मुख मुकुट के ठीक नीचे छिपा हुआ है, जो भक्तों के सभी कष्टों को एक साथ हर लेता है।
बुढ़वा मंगल का महाकुंभ:- वैसे तो हर मंगलवार यहाँ हजारों भक्त आते हैं, लेकिन बुढ़वा मंगल (भाद्रपद मास के मंगलवार) के दिन यहाँ कानपुर ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं और तब मंदिर पूरी रात भक्तों के लिए खुला रहता है।
मनोकामना पूर्ति का सिंदूरी चोला:- मान्यता है कि यदि कोई भक्त लगातार 5 या 11 मंगलवार यहाँ आकर बजरंगबली को सिंदूर का चोला और बेसन के लड्डू अर्पित करता है, तो उसकी कुंडली के बड़े से बड़े ग्रह दोष (जैसे शनि की साढ़ेसाती या राहु-केतु दोष) तुरंत शांत हो जाते हैं।