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श्री पातालेश्वर महादेवन धाम

गंगापुर कॉलोनी, यशोदा नगर, कानपुर

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Category

  • मंदिर

मंदिर से जुड़ी रोचक कथा

स्थानीय मान्यता के अनुसार:

भगवान शिव के स्वप्न और घसियारे की दिव्य कथा:

स्थानीय मान्यता के अनुसार कानपुर के यशोदा नगर में स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी कथा अत्यंत दिव्य और चमत्कारी है, जो भक्तों की अगाध आस्था का मुख्य आधार है। स्थानीय लोक मान्यताओं के अनुसार, लगभग दो शताब्दी पहले यह संपूर्ण क्षेत्र मानव आबादी से दूर एक अत्यंत सघन और बीहड़ जंगल हुआ करता था। इस जंगल में दूर-दूर से पशु चरवाहे और घास काटने वाले लोग आते थे।

एक दिन एक गरीब घसियारा (घास काटने वाला) इस घने जंगल में पशुओं के लिए घास छील रहा था। घास काटते समय अचानक उसकी दरांती (हंसिया/खुरपी) जमीन के भीतर छिपे एक काले और कठोर पत्थर से टकरा गई। दरांती के टकराते ही उस पत्थर से अचानक रक्त (खून) की धारा बहने लगी। यह खौफनाक और अस्वाभाविक दृश्य देखकर वह घसियारा अत्यंत भयभीत हो गया। उसने डर के मारे तुरंत काम रोक दिया और अपने घर भाग गया। डर के कारण वह रात भर सो नहीं पाया और उसे तेज बुखार आ गया।

उसी रात सोते समय भगवान शिव उस घसियारे के स्वप्न में प्रकट हुए। महादेव ने अत्यंत शांत स्वर में उससे कहा, "हे वत्स! तुम डरो मत। जिस स्थान पर आज तुम्हारी दरांती टकराई है, वहां भूमि के भीतर मेरा वास है। मैं वहां 'पातालेश्वर शिवलिंग' के रूप में स्थापित हूँ। तुम कल सुबह वहां जाओ, उस स्थान की खुदाई करो और ग्रामीणों के सहयोग से वहां एक छोटा सा मंदिर बनवाकर मेरी पूजा प्रारंभ करो।"

अगले दिन सुबह उठते ही घसियारे का बुखार पूरी तरह गायब हो चुका था। उसने तुरंत गांव के मुखिया और अन्य लोगों को इकट्ठा किया और अपने स्वप्न की बात बताई। जब ग्रामीणों ने मिलकर उस निर्दिष्ट स्थान पर सावधानीपूर्वक खुदाई की, तो उन्हें भूमि की गहराई में एक दिव्य, स्वयंभू काले रंग का शिवलिंग प्राप्त हुआ। शिवलिंग के ऊपरी हिस्से पर दरांती की चोट का गहरा निशान साफ देखा जा सकता था। महादेव के आदेशानुसार ग्रामीणों ने उसी स्थान पर एक छोटे से चबूतरे और मंदिर का निर्माण कराया। आज भी भक्तों का मानना है कि जो कोई भी इस दरांती के निशान वाले शिवलिंग पर सावन में जल चढ़ाता है, उसकी सभी मनोकामनाएं तुरंत पूरी हो जाती हैं।

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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

उपलब्ध स्रोतों/मंदिर की जानकारी के अनुसार:

बीहड़ जंगल से भव्य शिवालय बनने का सफर:

उपलब्ध स्रोतों/मंदिर की जानकारी के अनुसार श्री पातालेश्वर महादेवन धाम का इतिहास कानपुर (तत्कालीन कान्हपुर) के औद्योगिक और शहरी विकास के समानांतर चलता है। ऐतिहासिक साक्ष्यों और बुजुर्गों के अनुसार, यह मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है। जब इस शिवलिंग की खोज हुई, तब कानपुर का यह दक्षिणी हिस्सा पूरी तरह से ग्रामीण और वन क्षेत्र के अंतर्गत आता था। शुरुआत में यह केवल मिट्टी और पत्थरों से बना एक छोटा सा गर्भगृह था, जहां आसपास के गांवों के लोग केवल पूजा करने आते थे।

जैसे-जैसे समय बीतता गया और कानपुर शहर का विस्तार दक्षिण की ओर (यशोदा नगर और गंगापुर की तरफ) होने लगा, वैसे-वैसे इस मंदिर की ख्याति भी चारों ओर फैलने लगी। मंदिर के क्रमिक विकास का इतिहास भक्तों के संकल्पों से जुड़ा है। मान्यता है कि जिन व्यापारियों और स्थानीय जमींदारों ने मन्नतें मांगी थीं, उनके कार्य सिद्ध होने पर उन्होंने इस मंदिर के परिसर को बड़ा स्वरूप देना शुरू किया। इस प्रकार, एक साधारण घसियारे द्वारा स्थापित यह स्थान धीरे-धीरे एक भव्य और विशाल मंदिर परिसर में परिवर्तित हो गया।

ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भी स्थानीय लोगों ने इस मंदिर की स्वायत्तता और धार्मिक महत्ता को बनाए रखा। स्वतंत्रता के पश्चात, विशेषकर 1980 और 1990 के दशकों में जब यशोदा नगर एक प्रमुख आवासीय क्षेत्र के रूप में उभरा, तब इस मंदिर का पूर्ण जीर्णोद्धार किया गया। मंदिर के शिखर को ऊंचा और भव्य बनाया गया तथा भक्तों की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए विशाल प्रांगण और कतार प्रणाली का निर्माण कराया गया।

धार्मिक इतिहास के दृष्टिकोण से, पातालेश्वर महादेव मंदिर को 'दक्षिण कानपुर का राजा' भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी महत्ता उत्तर कानपुर के विश्वप्रसिद्ध बाबा आनंदेश्वर मंदिर (परमत) के समकक्ष मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं रहा, बल्कि यह स्थानीय समाज के सांस्कृतिक समागम, आध्यात्मिक चेतना और लोक-कथाओं को संजोए रखने का एक ऐतिहासिक केंद्र बन चुका है, जिसका दर्शन करने आज भी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोग आते हैं।

मंदिर / गुरुद्वारा से जुड़ी जानकारी

  • Profile ID
    4124
  • समर्पित
    भगवान शिव, शिवलिंग
  • स्थापना काल
    आधुनिक
  • वास्तुकला शैली
    पारंपरिक उत्तर भारतीय हिंदू मंदिर शैली (Nagara Architecture Style)
  • मंदिर/ गुरुद्वारा प्रबंधन
    स्थानीय भक्त समिति / मंदिर ट्रस्ट (श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर सेवा समिति) द्वारा प्रबंधित
  • संस्थापक
    एक स्थानीय अज्ञात घास काटने वाला (घसियारा) और तत्कालीन गंगापुर के ग्रामीण निवासी
  • स्थापना वर्ष
    19वीं शताब्दी की शुरुआत (लगभग 1800-1825 ईस्वी के बीच)
  • क्षेत्रफल
    लगभग 15,000 से 20,000 वर्ग फुट

पता

  • मंदिर / गुरुद्वारा स्थल
    गंगापुर कॉलोनी, यशोदा नगर, कानपुर
  • जिला
    Kanpur
  • राज्य
    उत्तर प्रदेश
  • पिन कोड
    208011

Location

  • Front Of Harihar Lawn 1b، 208021 Kanpur، India

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Closed

Open hours today: 5:00 am - 9:45 pm Toggle weekly schedule
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  • Friday

    5:00 am - 9:45 pm

  • Saturday

    5:00 am - 9:45 pm

  • Sunday

    5:00 am - 9:45 pm

  • September 28, 2026 4:00 am local time

दर्शन दिशा निर्देश

विशेष ध्यान दें: सावन के प्रत्येक सोमवार, महाशिवरात्रि और मुख्य त्योहारों पर मंदिर 24 घंटे भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहता है।

आरती / पाठ का समय

  • प्रातः आरती / पाठ का समय
    सुबह 04:30 बजे से 05:00 बजे
  • संध्या आरती / पाठ का समय
    शाम 07:00 बजे से 07:45 बजे

Author

Author avatar
komal singh

प्रकाशित

  • प्रकाशन की तिथि
    July 6, 2026

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आपके विचार

    स्थापित प्रतिमाएँ

    • भगवान शिव
    • शिवलिंग

    प्रकृति

    • नीम का पेड़
    • पीपल का पेड़
    • बरगद वृक्ष

    क्या आप जानते हैं?

    1. पाताल से जुड़ाव: इस मंदिर का नाम 'पातालेश्वर' इसलिए है क्योंकि इसका मुख्य स्वयंभू शिवलिंग सामान्य भूमि स्तर से काफी नीचे (पाताल की दिशा में) गहराई में स्थित है।
    2. आज भी मौजूद है चोट का निशान: शिवलिंग के शीर्ष पर आज भी वह प्राचीन निशान मौजूद है, जो घसियारे की दरांती से अनजाने में लगा था। भक्त इसे महादेव का साक्षात चमत्कार मानते हैं।

    3. अद्भुत प्राकृतिक शीतलता: मंदिर के भूमिगत गर्भगृह में प्रवेश करते ही बाहरी तापमान की तुलना में अत्यधिक शीतलता और शांति का अनुभव होता है।
    4. दक्षिण का परमत: दक्षिण कानपुर के निवासियों के लिए इस मंदिर का महत्व परमत के बाबा आनंदेश्वर मंदिर जितना ही पवित्र और फलदायी माना जाता है।

    प्रमुख सुविधाएँ

    • CCTV
    • Flower Shop
    • Havan Kund Facilities
    • Wheelchair
    • दान पात्र
    • ध्यान केन्द्र (Meditation Point)
    • पेय जल
    • प्रसाद काउंटर
    • बैठने की सुविधा

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    सूचना पट

    1. मंगला आरती व प्रथम दर्शन: सुबह 04:30 बजे से 05:00 बजे तक।
    2. मध्याह्न भोग व विश्राम (पट बंद): दोपहर 12:00 बजे से 01:00 बजे तक (केवल सामान्य दिनों में)।
    3. संध्या श्रृंगार एवं भव्य आरती: शाम 07:00 बजे से 07:45 बजे तक।
    4. शयन आरती व समापन: रात्रि 09:45 बजे।

     

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